ब्रज के 12 वनों में एक वन ऐसा है जहाँ आज भी प्रेम की मीठी आवाज गूंजती है, उसका नाम है कोकिलावन। यह पवित्र धाम मथुरा से लगभग 50 किलोमीटर और नंदगाँव से सिर्फ 10किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जो भक्त ब्रज की परिक्रमा करता है, वह कोकिलावन के दर्शन किए बिना उसकी यात्रा अधूरी मानी जाती है।
आज हम इसी वन की वह लोक कथा जानेंगे जो वृद्ध संत अपनी कुटिया में हर शाम सुनाते हैं।
मुख्य कथा: राधा रानी का मान और कृष्ण का कोयल बनना
कहते हैं एक बार वसंत ऋतु का समय था। बरसाना और नंदगाँव में होली की धूम थी। इसी बीच किसी छोटी सी बात पर राधा रानी रूठ गईं और उन्होंने श्रीकृष्ण से बात करना बंद कर दिया। सखियों ने बहुत कोशिश की, लेकिन राधा जी का मान टूट ही नहीं रहा था।
श्रीकृष्ण को राधा के बिना एक पल भी अच्छा नहीं लग रहा था। वह उदास होकर इसी वन में आकर बैठ गए। तभी उन्होंने देखा कि एक पेड़ पर कोयल बड़ी मीठी आवाज में कुहू-कुहू कर रही है। उसकी आवाज सुनकर पूरा वन आनंद से भर रहा है।
तभी श्रीकृष्ण के मन में एक लीला आई। उन्होंने सोचा – राधा को कोयल की आवाज बहुत प्रिय है, क्यों न मैं ही कोयल बन जाऊं।
बस फिर क्या था, लीलाधारी श्रीकृष्ण उसी क्षण सुंदर काली कोयल बन गए। और इतनी मधुर, इतनी दर्द भरी कुहू-कुहू करने लगे कि पत्ते भी झूमने लगे। यह आवाज सीधे बरसाना में राधा रानी के कानों तक पहुंची।
राधा रानी जो मान में बैठी थीं, वह इस आवाज को सुनकर खुद को रोक नहीं पाईं। उन्होंने सखी ललिता से कहा – “ललिता, देख तो इस वन में कौन सी कोयल इतना मीठा गा रही है, मेरा मन खिंचा जा रहा है।”
राधा रानी दौड़ती हुई उस वन में आईं। यहाँ आकर उन्होंने देखा कि वह कोई साधारण कोयल नहीं, बल्कि उनके प्राणप्रियतम श्रीकृष्ण ही कोयल के रूप में बैठे हैं। कृष्ण ने तुरंत अपना असली रूप धारण कर लिया और राधा रानी को गले लगा लिया। इस प्रकार राधा का मान टूटा।
तभी से इस वन का नाम कोकिलावन पड़ा। कोकिल का अर्थ ही कोयल होता है।
कोकिलावन का अन्य महत्व
- शनि देव का मंदिर: इसी वन में शनिदेव का एक बहुत ही प्राचीन मंदिर है। कहा जाता है कि शनिदेव ने यहाँ भगवान कृष्ण की तपस्या की थी और उन्हें कोयल रूप में दर्शन दिए थे। इसलिए यहाँ शनिदेव भी कोयल रूप में ही पूजे जाते हैं।
- पति-पत्नी के प्रेम के लिए: मान्यता है कि जो पति-पत्नी यहाँ साथ में कोयल कुंड की परिक्रमा करते हैं और कोयल की आवाज सुनते हैं, उनके जीवन में कभी प्रेम कम नहीं होता। यहाँ हर साल सैकड़ों नवविवाहित जोड़े आते हैं।
- कुंड का जल: यहाँ एक पवित्र कुंड है जिसका नाम कोयल कुंड है। इसके जल को बहुत ही चमत्कारी माना जाता है।
यात्रा कैसे करें?
आप मथुरा से नंदगाँव वाली बस पकड़ सकते हैं। नंदगाँव से ई-रिक्शा 50 रुपये में आपको कोकिलावन छोड़ देगा। सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक मंदिर खुला रहता है।
तो अगली बार जब आप ब्रज आएं, तो कोकिलावन जाना न भूलें और कान लगाकर सुनें, शायद आपको भी वह मीठी कुहू-कुहू सुनाई दे जाए।
राधे राधे! कोकिलावन धाम की जय!
