प्रियाकांत जू मंदिर वृंदावन: कमल के पुष्प पर विराजे श्री राधा-कृष्ण का अलौकिक धाम (संपूर्ण गाइड)
लेखक: Brajmahima Team | अपडेटेड: 2026 | श्रेणी: ब्रज दर्शन एवं मंदिर
भगवान श्री कृष्ण की पावन क्रीड़ास्थली वृंदावन में आधुनिक वास्तुकला और प्राचीन भक्ति-रस का एक बेजोड़ संगम देखने को मिलता है। छटीकरा-वृंदावन मार्ग पर स्थित 'प्रियाकांत जू मंदिर' (Priya Kant Ju Mandir) यहाँ के सबसे सुंदर, शांत और भव्य मंदिरों में से एक है। विशाल **कमल के फूल (Lotus Flower)** के आकार में बना यह मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अद्भुत बनावट के कारण दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेता है।
प्रसिद्ध कथावाचक और संत पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज की प्रेरणा से निर्मित यह मंदिर स्थापत्य कला की एक अनूठी मिसाल है। आज के इस विस्तृत लेख में Brajmahima.com आपके लिए लेकर आया है प्रियाकांत जू मंदिर के इतिहास, धार्मिक महत्व, दर्शन समय और प्रमुख आकर्षणों की पूरी जानकारी।
मंदिर की अनूठी बनावट और वास्तुकला (Lotus Shape Temple)
प्रियाकांत जू मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार है। संपूर्ण मंदिर संरचना को एक खिलते हुए विशालकाय सफेद कमल के फूल के रूप में ढाला गया है।
- कमल रूपी संरचना: मंदिर के चारों ओर कमल की विशाल पंखुड़ियाँ बनाई गई हैं, जो जल सरोवर के बीच स्थित प्रतीत होती हैं।
- तालाब और फुहारे: मंदिर परिसर के चारों तरफ सुंदर जलकुंड बनाए गए हैं, जिनमें शाम के समय चलने वाले रंग-बिरंगे फाउंटेन (लाइट एंड साउंड फुहारे) इसके सौंदर्य में चार चांद लगा देते हैं।
- विशाल और भव्य प्रांगण: मंदिर का अंदरूनी प्रांगण अत्यंत विशाल और हवादार है, जहाँ हजारों श्रद्धालु एक साथ बैठकर कीर्तन और ध्यान कर सकते हैं।
'प्रियाकांत जू' नाम का अर्थ और मुख्य आराध्य
इस मंदिर के नाम में ही श्री राधा-कृष्ण का अटूट प्रेम समाहित है:
- प्रिया जी: श्री राधारानी को प्रेम से 'प्रिया जी' कहा जाता है।
- कांत जी: भगवान श्री कृष्ण को 'कांत' (प्रियतम) कहा जाता है।
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में **श्री प्रियाकांत जू (श्री राधा-कृष्ण)** की अति-मनमोहक और दिव्य प्रतिमा स्थापित है। इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में भगवान शिव (चन्द्रमौलेश्वर महादेव), श्री राम दरबार, और हनुमान जी के सुंदर विग्रह भी विराजमान हैं।
मंदिर का इतिहास और विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट
इस पावन मंदिर का निर्माण **विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट** द्वारा करवाया गया था। पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के मार्गदर्शन में वर्ष 2012 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्ष 2016 में यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विधिवत खोल दिया गया।
यह संस्थान धार्मिक कार्यों के साथ-साथ समाज सेवा, अन्नक्षेत्र (मुफ्त भोजन), गौ-सेवा और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।
प्रियाकांत जू मंदिर के मुख्य आकर्षण
यदि आप प्रियाकांत जू मंदिर के दर्शन के लिए आ रहे हैं, तो इन प्रमुख अनुभवों को बिल्कुल न चूकें:
- शाम की भव्य आरती व लाइटिंग: सूर्यास्त के बाद पूरे मंदिर पर बहुरंगी लाइटें जलती हैं। रोशनी में जगमगाता कमल रूपी मंदिर अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।
- म्यूजिकल फाउंटेन (संगीत फुहारे): शाम के समय मंदिर परिसर में चलने वाला फाउंटेन शो बच्चों और परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
- अन्नपूर्णा रसोई (प्रसाद): मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध सात्विक भोजन और महाप्रसाद की सुंदर व्यवस्था उपलब्ध है।
- शांति और स्वच्छता: मंदिर परिसर में अत्यधिक सफाई और शांति का माहौल रहता है, जहाँ बैठकर नाम-जप करने से अपार मानसिक शांति मिलती है।
मंदिर का समय और आरती की सारणी
यात्रा की योजना बनाते समय मंदिर के कपाट खुलने और बंद होने का समय ध्यान में रखें:
| विवरण | समय / जानकारी |
|---|---|
| प्रातः दर्शन समय | प्रातः 06:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक |
| दोपहर विश्राम (कपाट बंद) | दोपहर 12:30 बजे से सायं 04:30 बजे तक |
| संध्या दर्शन समय | सायं 04:30 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक |
| मंगला आरती | प्रातः 06:00 बजे |
| संध्या आरती | सायं 07:00 बजे (मौसम अनुसार परिवर्तन संभव) |
| प्रवेश शुल्क | पूर्णतः निःशुल्क (Free Entry) |
प्रियाकांत जू मंदिर कैसे पहुँचें?
प्रियाकांत जू मंदिर की कनेक्टिविटी बेहद सुगम है क्योंकि यह मुख्य हाईवे के बिल्कुल करीब स्थित है:
- स्थान: छटीकरा-वृंदावन मार्ग, NH-2 मोड़ के पास, वृंदावन।
- रेल मार्ग द्वारा: मथुरा जंक्शन से मंदिर की दूरी लगभग 12 किलोमीटर है। स्टेशन से ऑटो या ई-रिक्शा द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
- सड़क मार्ग द्वारा: दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे (NH-2) से छटीकरा कट लेकर वृंदावन की ओर मुड़ते ही 1 किमी के अंदर यह मंदिर स्थित है।
