बिरला मंदिर मथुरा (गीता मंदिर) : इतिहास, वास्तुकला और दर्शन की पूरी जानकारी | http://Brajmahima.com
मथुरा-वृंदावन की पावन भूमि पर सैकड़ों प्राचीन मंदिर हैं, लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा मंदिर भी है जो अपनी आधुनिक भव्यता और आध्यात्मिक संदेश के लिए जाना जाता है – बिरला मंदिर मथुरा, जिसे गीता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप मथुरा घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यह मंदिर आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए। आज brajmahima.com आपको इस मंदिर की पूरी जानकारी देगा।
बिरला मंदिर मथुरा क्या है?
बिरला मंदिर मथुरा का असली नाम लक्ष्मी नारायण मंदिर है, लेकिन इसे बनाने वाले प्रसिद्ध उद्योगपति घनश्याम दास बिरला जी के नाम पर इसे बिरला मंदिर कहा जाता है। मथुरा के सभी बड़े मंदिरों की तरह यह कोई 500 साल पुराना मंदिर नहीं है, बल्कि इसका निर्माण 1946 में शुरू होकर 1960 के दशक में पूरा हुआ था।
इस मंदिर को गीता मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके सभी स्तंभों और दीवारों पर श्रीमद्भगवद्गीता के 700 श्लोक संस्कृत में खुदे हुए हैं। यह भारत का पहला मंदिर है जहाँ पूरी गीता लिखी गई है।
बिरला मंदिर का इतिहास
बिरला परिवार भारत के सबसे बड़े मंदिर निर्माताओं में से एक है। उन्होंने दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद में भी बिरला मंदिर बनवाए हैं। मथुरा के इस मंदिर का निर्माण बिरला जी ने करवाया ताकि आने वाले तीर्थयात्रियों को गीता का ज्ञान हो सके।
कहा जाता है कि जब इस मंदिर का निर्माण हो रहा था, तब यहाँ के कारीगरों ने राजस्थान के सफेद मार्बल और लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया था, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है।
वास्तुकला – जो हर किसी का मन मोह लेती है
बिरला मंदिर की वास्तुकला देखते ही बनती है। यह मंदिर उत्तर भारतीय मंदिर शैली और आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत संगम है।
1. भव्य शिल्पकला: मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही आपको सफेद संगमरमर की चमक दिखाई देगी। गर्भगृह में भगवान लक्ष्मी नारायण (विष्णु जी) की मनमोहक मूर्ति है। उनके साथ गरुड़ जी भी विराजमान हैं।
2. गीता के श्लोक: मंदिर के 18 बड़े स्तंभों पर गीता के 18 अध्यायों के श्लोक लिखे हैं। आप जैसे-जैसे मंदिर की परिक्रमा करेंगे, आप पूरी गीता पढ़ लेंगे।
3. चित्रकला: दीवारों पर भगवान कृष्ण की लीलाओं, महाभारत के दृश्यों और गीता उपदेश की सुंदर चित्रकारी की गई है।
4. शांत वातावरण: वृंदावन के भीड़-भाड़ वाले मंदिरों के विपरीत, यह मंदिर बहुत ही शांत और साफ-सुथरा है। यहाँ बैठकर आप ध्यान और भजन कर सकते हैं।
बिरला मंदिर मथुरा का धार्मिक महत्व
यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं है। यहाँ आने से आपको दो लाभ मिलते हैं – भगवान विष्णु के दर्शन और गीता ज्ञान की प्राप्ति। माना जाता है कि इस मंदिर में गीता के श्लोकों को पढ़ने से मन की अशांति दूर होती है और जीवन में सही निर्णय लेने की शक्ति मिलती है।
छात्र, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले और जीवन में भटके हुए लोग यहाँ विशेष रूप से आकर शांति पाते हैं।
दर्शन समय, टिकट और कैसे पहुंचे? – http://Brajmahima.com गाइड
दर्शन समय:
- सुबह: 5:00 बजे से 12:00 बजे तक
- शाम: 2:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
- आरती का समय: सुबह 6:00 बजे और शाम 7:00 बजे
प्रवेश शुल्क: यहाँ कोई टिकट नहीं है, प्रवेश बिल्कुल निशुल्क है।
कैसे पहुंचे:
- यह मंदिर मथुरा-वृंदावन रोड पर स्थित है, मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से केवल 3.5 किलोमीटर दूर है।
- मथुरा बस स्टैंड से ऑटो या ई-रिक्शा से आप 10 मिनट में यहाँ पहुँच सकते हैं।
- अगर आप वृंदावन से आ रहे हैं तो वृंदावन से इसकी दूरी 6 किलोमीटर है।
फोटो और वीडियो: मंदिर परिसर के अंदर फोटो खींचना मना है, लेकिन बाहर से आप भव्य इमारत की फोटो ले सकते हैं।
brajmahima.com की तरफ से जरूरी टिप्स
- सुबह जल्दी जाएं, उस समय भीड़ कम होती है और फोटो अच्छी आती हैं।
- मंदिर के पास ही प्रसाद की दुकानें हैं, यहाँ से आप भोग ले सकते हैं।
- मंदिर के पास जूते-चप्पल रखने की निशुल्क व्यवस्था है।
- इस मंदिर के दर्शन के बाद आप पास में ही स्थित कृष्ण जन्मभूमि भी जा सकते हैं।
ब्रज के ऐसे ही प्रसिद्ध और गुप्त मंदिरों की जानकारी, उनकी कहानी और यात्रा वृतांत के लिए जुड़े रहिए brajmahima.com के साथ।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. बिरला मंदिर मथुरा किस देवता को समर्पित है?
यह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है।
2. इसे गीता मंदिर क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसकी दीवारों पर पूरी भगवद्गीता लिखी हुई है।
3. बिरला मंदिर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बीच कितनी दूरी है?
लगभग 2 किलो मीटर
