दानघाटी मंदिर गोवर्धन

danghati-mandir-goverdhan

दानघाटी मंदिर गोवर्धन: जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों से दान लिया था | ब्रज की पावन भूमि में हर कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की कहानी बसी है। ऐसी ही एक अलौकिक लीला स्थली है गोवर्धन का दानघाटी मंदिर। अगर आप गोवर्धन परिक्रमा करने जा रहे हैं तो यह मंदिर आपकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। आज brajmahima.com पर हम आपको इस चमत्कारी मंदिर की पूरी कथा, महत्व और दर्शन की जानकारी देंगे।

दानघाटी मंदिर क्या है और इसका नाम दानघाटी क्यों पड़ा ?

गोवर्धन पर्वत की तलहटी में स्थित यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब गोपियां मथुरा में दूध-दही बेचने जाती थीं तो इसी घाटी से होकर गुजरती थीं। भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ यहाँ उन्हें रोक लेते थे और उनसे दूध-दही का दान मांगते थे।

इसलिए इस  स्थान का नाम दानघाटी पड़ा। यहाँ भगवान ने दानलीला की थी। इसीलिए यहाँ विराजमान ठाकुर जी को  दानबिहारी भी कहा जाता है।

दानघाटी मंदिर की पौराणिक कथा – दानलीला

एक बार की बात है, सभी गोपियां सिर पर मटकी रखकर मथुरा जा रही थीं। श्रीकृष्ण ने अपने सखा श्रीदामा, सुबल और मधुमंगल के साथ इस संकरी घाटी को रोक लिया। कृष्ण ने कहा – “गोपियों, तुम रोज इस रास्ते से जाती हो, पर गोवर्धन महाराज को दान नहीं देती। पहले दान दो, तब आगे जाओ।”

गोपियों ने कहा – “लाला, हम गरीब हैं, हमारे पास दान देने को क्या है?” इस पर कृष्ण मुस्कुराए और बोले – “तुम्हारी मटकी में जो माखन-मिश्री है, वही हमारा दान है।”

फिर क्या था, खूब हंसी-मजाक, नोंक-झोंक हुई और अंत में गोपियों को अपना थोड़ा-थोड़ा दही-माखन श्रीकृष्ण को देना पड़ा। यही प्रेम भरी लेन-देन दानलीला कहलाती है। माना जाता है कि आज भी इस मंदिर में दानलीला की वह मधुरता महसूस होती है।

दानघाटी मंदिर की वास्तुकला और मुख्य आकर्षण

दानघाटी मंदिर एक प्राचीन और भव्य मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण, श्री राधा रानी और उनके सखा ललिता-विशाखा की सुंदर मूर्तियां हैं। मंदिर के मध्य में गिरिराज जी की एक विशाल शिला भी स्थापित है।

मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ से गोवर्धन परिक्रमा शुरू होती है और यहीं पर समाप्त भी होती है। 21 किलोमीटर की पूरी परिक्रमा करने वाले भक्त यहाँ दंडवत परिक्रमा भी करते हैं। मंदिर के सामने का कुंड और बाजार हमेशा भक्तों से भरा रहता है।

परिक्रमा में दानघाटी मंदिर का महत्व

बिना दानघाटी मंदिर के दर्शन के गोवर्धन परिक्रमा अधूरी मानी जाती है। हर महीने की पूर्णिमा और एकादशी को यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं। गुरु पूर्णिमा और गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) के दिन तो यहाँ मेला लगता है।

मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से यहाँ आकर गिरिराज जी से मन्नत मांगता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। संतान प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि और विवाह की बाधा दूर करने के लिए लोग यहाँ विशेष पूजा कराते हैं।

दानघाटी मंदिर कैसे पहुंचे?

कैसे पहुंचे:
– सड़क मार्ग से:मथुरा से गोवर्धन की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है। मथुरा बस स्टैंड से हर 15 मिनट में गोवर्धन के लिए बस और ऑटो मिलते हैं।
– नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है।
– *ठहरने की व्यवस्था:* गोवर्धन में धर्मशाला और होटल आसानी से मिल जाते हैं।

*brajmahima.com की सलाह*

अगर आप पहली बार गोवर्धन जा रहे हैं तो परिक्रमा नंगे पाँव करें और “राधे-राधे” का जाप करते रहें। परिक्रमा के दौरान किसी को भी अपशब्द न कहें। दानघाटी मंदिर पर प्रसाद के रूप में माखन-मिश्री जरूर चढ़ाएं।

ब्रज की ऐसी ही अनसुनी कथाओं, मंदिरों के इतिहास और यात्रा गाइड के लिए पढ़ते रहिए *brajmahima.com*। हमारा उद्देश्य है ब्रज की महिमा को घर-घर तक पहुंचाना।

*अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)*

*1. दानघाटी मंदिर कहाँ स्थित है?*
यह उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन कस्बे में स्थित है।

*2. दानघाटी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?*
क्योंकि यहाँ भगवान कृष्ण ने गोपियों से दान लेने की लीला की थी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *